नई दिल्ली: भारत के बैटरी सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार लगभग 38 अरब डॉलर के निवेश की योजना पर काम कर रही है, जिससे देश में बैटरी निर्माण और सप्लाई चेन को मजबूती मिल सके।
क्या है निवेश योजना?
इस योजना का मकसद भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत बैटरी इकोसिस्टम तैयार करना है। अगर यह कदम आगे बढ़ता है, तो इलेक्ट्रिक वाहनों, ऊर्जा भंडारण और औद्योगिक बैटरी सेक्टर को बड़ी रफ्तार मिल सकती है।
Approved Manufacturing List System
रिपोर्ट के अनुसार सरकार एक नए सिस्टम पर भी काम कर रही है, जिसे Approved Manufacturing List System कहा जा रहा है। इस सिस्टम के तहत सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए बैटरी सिर्फ चुनिंदा और मंजूरशुदा कंपनियों से ही ली जा सकेगी।
इस कदम से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही क्वालिटी स्टैंडर्ड और सप्लाई चेन सिक्योरिटी भी बेहतर हो सकती है। उद्योग जगत इसे बैटरी सेक्टर के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत मान रहा है।
हालांकि, अभी इस निवेश और सिस्टम को लेकर आधिकारिक विस्तृत घोषणा का इंतजार है। उसके बाद ही साफ होगा कि यह योजना किस तरह लागू की जाएगी और किन कंपनियों को इसका फायदा मिलेगा।
निष्कर्ष: अगर यह योजना जमीन पर उतरती है, तो आने वाले समय में भारत का बैटरी सेक्टर तेजी से बढ़ सकता है और इसमें नई नौकरियों, निवेश और तकनीकी विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।






